कुरुक्षेत्र पैनोरमा विज्ञान केंद्र
(राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई)
कुरुक्षेत्र पैनोरमा विज्ञान केंद्र
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई

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कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र, कुरुक्षेत्र, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली 'राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद' (NCSM) की एक उप-इकाई है। जनता के बीच वैज्ञानिक सोच, नवाचार और जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित यह केंद्र, विज्ञान संचार को कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ जोड़ता है। अपनी स्थापना के समय से ही, यह केंद्र आगंतुकों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए संवादात्मक विज्ञान प्रदर्शनियों, शैक्षिक गतिविधियों, सेवा विस्तार कार्यक्रम और मनोरंजक सीखने के अनुभवों हेतु एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता आ रहा है।
इस केंद्र का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 मार्च 2001 को किया था। इस उद्घाटन के साथ ही, इस क्षेत्र में विज्ञान के प्रचार-प्रसार के एक नए युग की शुरुआत हुई। केंद्र की स्थापना के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सुविधाएं भी शुरू की गईं, जिनमें तारामंडल शो, विज्ञान पार्क और मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनी बस शामिल हैं; इन सुविधाओं ने विज्ञान के प्रचार-प्रसार संबंधी गतिविधियों को काफी मजबूती प्रदान की और हरियाणा तथा पड़ोसी राज्यों के ग्रामीण एवं दूरदराज के क्षेत्रों में विज्ञान के संचार को संभव बनाया।
कुरुक्षेत्र पैनोरमा और विज्ञान केंद्र ने समय-समय पर आगंतुकों की बदलती रुचियों और शैक्षिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी सुविधाओं और कार्यक्रमों का विस्तार किया। 2004 में 3D फिल्म शो की शुरुआत हुई, जिसने आगंतुकों को एक आकर्षक दृश्य-श्रव्य (ऑडियो-विज़ुअल) सीखने का अनुभव दिया। इसके बाद 2008 में क्रोमा की स्टूडियो का उद्घाटन हुआ, जो एक इंटरैक्टिव डिजिटल अनुभव प्रदान करता है।
भारत की समृद्ध वैज्ञानिक विरासत को उजागर करने के उद्देश्य से, 2012 में 'भारतीय वैज्ञानिक एवं तकनीकी विरासत गैलरी' का उद्घाटन किया गया। इसमें प्राचीन और मध्यकालीन भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी में योगदान को प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा, 1 जून 2015 को 'संग्रहालय दुकान' और 'स्मारिका कॉर्नर' जैसी आगंतुक-केंद्रित सुविधाएं भी जोड़ी गईं।
केंद्र ने 5 सितंबर 2019 को "ऊर्जा" विषय पर एक नई विकसित 'मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनी' के उद्घाटन के साथ, अपनी पहुँच और विषय-आधारित प्रदर्शनी क्षमताओं का विस्तार किया। हाल के वर्षों में, प्रकृति-आधारित कई शैक्षिक स्थल भी जोड़े गए हैं—जिनमें 2022 में हर्बल पार्क, 2023 में कैक्टस पार्क और 2024 में बटरफ्लाई पार्क शामिल हैं—जिन्होंने जैव विविधता जागरूकता और पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दिया है।
वर्ष 2025 केन्द्र के रजत जयंती समारोह के अंतर्गत विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। इस अवधि में केन्द्र में अनेक नई सुविधाओं एवं प्रदर्शों को जोड़ा गया। 22 मार्च 2025 को विज्ञान पार्क में “तालाब पारितंत्र” का शुभारम्भ किया गया, जिससे पर्यावरण एवं जैव-विविधता संबंधी वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने में सहायता प्राप्त होगी। इसके पश्चात् 7 सितम्बर 2025 को केन्द्र में भोजनालय सुविधा का उद्घाटन किया गया, जिससे विज़िटरों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।
साथ ही, 4 दिसम्बर 2025 को उन्नत शैक्षिक सुविधाओं के रूप में “गोले पर ज्ञान” तथा नव-विकसित “ऊर्जा गोला प्रदर्श” का उद्घाटन किया गया। इन नवीन पहलों ने केन्द्र की शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं विज़िटर-अनुभव संबंधी गतिविधियों को और अधिक समृद्ध, आधुनिक एवं आकर्षक बनाया।
कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केन्द्र ने आधुनिकीकरण एवं विज़िटर सहभागिता के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, केन्द्र के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती समारोह के अंतर्गत 6 मार्च 2026 को आधुनिक तकनीक आधारित “फैंटेसी राइड (सिम्युलेटर)” सुविधा का उद्घाटन किया। यह नवीन सुविधा विज़िटरों को विज्ञान एवं तकनीक का रोमांचक एवं अनुभवात्मक परिचय प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।
केंद्र अपनी आगामी विकास पहलों के तहत आगंतुकों को विज्ञान सीखने का एक गहन और तकनीकी अनुभव प्रदान करने के लिए एक वर्चुअल रियलिटी (वीआर) सुविधा शुरू करने की भी योजना बना रहा है। वर्तमान समय में कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केन्द्र उत्तरी भारत में विज्ञान संचार के एक महत्वपूर्ण केन्द्र के रूप में स्थापित हो चुका है। यह केन्द्र सहभागितापूर्ण प्रदर्शों, शैक्षिक कार्यक्रमों, जन-जागरूकता गतिविधियों, पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहलों तथा मनोरंजक विज्ञान अधिगम के माध्यम से विज्ञान को जनसामान्य तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है। केन्द्र निरंतर सभी आयु वर्ग के लोगों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं वैज्ञानिक चिंतन को प्रोत्साहित करते हुए राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् (NCSM) द्वारा परिकल्पित विज्ञान लोकप्रियकरण के उद्देश्य को सशक्त रूप से आगे बढ़ा रहा है।
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