कुरुक्षेत्र पैनोरमा विज्ञान केंद्र
(राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई)
कुरुक्षेत्र पैनोरमा विज्ञान केंद्र
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई

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सेंटर हेड डेस्क

सीमाओं से परे सीखने को प्रोत्साहित करना

भारत के संविधान का अनुच्छेद 51A(h) प्रत्येक नागरिक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानवतावाद तथा जिज्ञासा एवं सुधार की भावना विकसित करने का दायित्व प्रदान करता है। यही संवैधानिक दायित्व देश में विज्ञान संचार के प्रयासों की आधारशिला है। इसी दृष्टि के अनुरूप, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद् (एनसीएसएम) की स्थापना संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संगठन के रूप में की गई। अपने देशव्यापी विज्ञान केन्द्रों एवं जनसंपर्क पहलों के माध्यम से एनसीएसएम वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने, तार्किक सोच को प्रोत्साहित करने तथा विज्ञान के प्रति जनसहभागिता को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एनसीएसएम की एक घटक इकाई के रूप में, कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केन्द्र को व्यापक दायित्वों के साथ पुनर्स्थापित किया जा रहा है—जहाँ विज्ञान संचार केवल जानकारी के प्रसार तक सीमित न होकर सहभागिता, व्याख्या और सामाजिक प्रासंगिकता तक विस्तृत हो। कुरुक्षेत्र की ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण भूमि पर स्थित यह केन्द्र दोहरी जिम्मेदारी निभाता है: वैज्ञानिक चिंतन को सभ्यतागत परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करना तथा विज्ञान को विविध वर्गों के लिए सुलभ, जिज्ञासापरक और सार्थक बनाना। हमारी वर्तमान दिशा एक समग्र विज्ञान सहभागिता तंत्र के विकास पर आधारित है। मोबाइल साइंस एग्ज़ीबिशन (एमएसई) केन्द्र की पहुँच को उसके परिसर से बाहर ले जाकर विद्यालयों एवं समुदायों तक विज्ञान पहुँचाता है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीटीपी) जैसी संरचित क्षमता-विकास पहलें शिक्षकों को प्रभावी विज्ञान संचार के लिए सशक्त बनाने का कार्य करती हैं, जबकि समर हॉबी कैंप जैसे कार्यक्रम युवा शिक्षार्थियों में जिज्ञासा एवं रचनात्मकता को प्रोत्साहित करते हैं।
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यह केन्द्र विज्ञान मेले आयोजित कर विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लिए एक सशक्त मंच भी प्रदान करता है, जिससे विद्यार्थियों में नवाचार, प्रयोगधर्मिता तथा वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा मिलता है। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस, पृथ्वी दिवस, विश्व पर्यावरण दिवस, विश्व ओज़ोन दिवस तथा विश्व एड्स दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय दिवसों का सुव्यवस्थित आयोजन किया जाता है, ताकि वैज्ञानिक समझ को वास्तविक जीवन की चुनौतियों एवं सामाजिक जागरूकता से जोड़ा जा सके।

केन्द्र अपने अनुभवात्मक एवं पर्यावरणीय शिक्षण अवसंरचना को विभिन्न रणनीतिक पहलों के माध्यम से निरंतर सुदृढ़ कर रहा है। साइंस पार्क को थीम आधारित बाह्य शिक्षण स्थलों से समृद्ध किया गया है, जिनमें कैक्टस पार्क (5 जून 2023) एवं बटरफ्लाई पार्क (6 मार्च 2024) शामिल हैं, जिनका उद्देश्य पारिस्थितिक जागरूकता एवं जैव विविधता शिक्षा को बढ़ावा देना है। इस पहल को आगे बढ़ाते हुए, 22 मार्च 2025 को पॉण्ड इकोसिस्टम का उद्घाटन किया गया, जो जलीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणीय संतुलन का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत करता है।

विज़िटर-केंद्रित सुविधाओं को भी 7 सितंबर 2025 को समर्पित कैफेटेरिया सुविधा के उद्घाटन के माध्यम से सुदृढ़ किया गया, जिससे अधिक समावेशी एवं सुविधाजनक सार्वजनिक अनुभव सुनिश्चित हुआ। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में, सिल्वर जुबली समारोह के अंतर्गत 4 दिसंबर 2025 को उद्घाटित “नॉलेज ऑन स्फीयर (KOS)” सुविधा, पृथ्वी एवं अंतरिक्ष विज्ञान संबंधी घटनाओं के डेटा-आधारित दृश्यांकन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए, 6 मार्च 2026 को कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केन्द्र के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रजत जयंती वर्ष के दौरान उद्घाटित “सिम्युलेटर (फैंटेसी राइड)” सुविधा को एक प्रमुख आकर्षण के रूप में विकसित किया गया है, जो अनुभव-आधारित एवं इमर्सिव लर्निंग का वातावरण प्रदान करती है।

इन पहलों को पूरक रूप से सशक्त बनाते हुए, महाभारत पर आधारित 3D फिल्म इतिहास, संस्कृति एवं प्रौद्योगिकी को एकीकृत व्याख्यात्मक अनुभव में रूपांतरित करती है, जबकि प्रस्तावित वीआर थिएटर विज़िटर सहभागिता को और अधिक उन्नत करने हेतु उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझते हुए कि सार्थक जनसहभागिता विज़िटर्स की सुविधा एवं सुगमता पर भी निर्भर करती है, केन्द्र की अवसंरचना एवं सेवाओं को निरंतर सुदृढ़ करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि यह केन्द्र एक समग्र एवं समावेशी सार्वजनिक स्थल के रूप में कार्य कर सके।

आज जब विज्ञान सार्वजनिक नीति, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं प्रौद्योगिकी को निरंतर प्रभावित कर रहा है, तब हमारे जैसे संस्थानों की भूमिका एक जागरूक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से संपन्न समाज के निर्माण में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। इसके लिए केवल अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकी ही नहीं, बल्कि प्रासंगिकता, अंतःविषय चिंतन तथा सहयोगात्मक जनसंपर्क के प्रति सतत प्रतिबद्धता भी आवश्यक है। हमारा आगे का मार्ग स्पष्ट है—कुरुक्षेत्र पैनोरमा एवं विज्ञान केन्द्र को एक दूरदर्शी, सामाजिक रूप से उत्तरदायी एवं बौद्धिक रूप से सशक्त संस्थान के रूप में स्थापित करना; ऐसा संस्थान जो लोगों को केवल विज्ञान सीखने के लिए ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रूप से सोचने के लिए भी प्रेरित करे।

डॉ. सुरेश कुमार सोनी
केंद्र प्रमुख
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