कुरुक्षेत्र पैनोरमा विज्ञान केंद्र
(राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई)
कुरुक्षेत्र पैनोरमा विज्ञान केंद्र
राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद की एक इकाई

गैलरी >> महाभारत पर आधारित पैनोरमा - कुरुक्षेत्र का युद्ध

इस केंद्र का प्रमुख आकर्षण महाभारत के महायुद्ध का जीवंत चित्रमाला है, जो कुरूक्षेत्र में लड़ी गई इस ग्रेट बोट को अत्यंत प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करता है। बेलनाकार (बेलनाकार) ऑडिटोरियम के मध्य भाग में स्थित विज़िटर 34 फीट ऊँची भव्य चित्रावली के माध्यम से पाण्डवों और कौरवों के मध्य में हुए 18 दिनों के युद्ध के विभिन्न प्रसंगों को सजीव रूप में अनुभव कर सकते हैं। महाभारत केवल एक ऐतिहासिक एवं धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि इसमें अनेक वैज्ञानिक संदर्भ भी निहित हैं। इनमें से खगोल विज्ञान, चिकित्सा, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जीव विज्ञान, युद्धकला और भूगोल जैसे विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों से संबंधित उल्लेखित हैं। प्राचीन भारत की भौगोलिक संरचना, भू-वैज्ञानिक विकास और महाकाव्यों के प्रमुख स्तंभों का विवरण इन वैज्ञानिक संदर्भों को और अधिक स्पष्ट एवं अभिलेखित किया गया है।
स्क्रैच मास्टर्स के माध्यम से यह सूचीबद्ध किया गया है कि सात महाद्वीपों की अवधारणा का विकास कैसे और कब हुआ। इसका आरंभिक संदर्भ रामायण, महाभारत तथा प्राचीन काल के महाभाष्य में मिलता है, जो 1912 में जर्मन भू-वैज्ञानिक अल्फ्रेड वेगेनर द्वारा प्रतिपादित महाद्वीपीय राजवंश सिद्धांत (महाद्वीपीय बहाव सिद्धांत) से अत्यंत साम्य रखते हैं। दीर्घा में स्थापित कंप्यूटर-आधारित दर्शन विज़िटर को अस्त्र-शास्त्रों के संयोजन, युद्ध स्थापना (व्यूह रचना) और प्राचीन काल में कल्पित घटनाएं-जैसे पूर्ण सूर्य ग्रहण-की व्याख्या को समझने का अवसर प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त, खगोलीय आंकड़े एवं ऐतिहासिक स्मारकों के आधार पर महाभारत युद्ध की विभिन्न तिथियों को स्थापित करने का भी प्रयास किया गया है
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